Wednesday, September 30, 2015

माता महा लक्ष्मी के व्रत के आखरी दिन की विधि

महा लक्ष्मी व्रत के आखरी दिन की विधि 

४ अक्तूबर और रविवार के दिन महालक्ष्मी व्रत का आखरी दिन हे और जिन लोगो ने यह व्रत किया हे उन सभी के लिए विधि सामग्री निचे मुजब हे कृपया ध्यान दे

और जो लोगो ने यह १४ दिनों का व्रत नहीं किया हे वो अगर लाभ लेना चाहते हे तो आखरी दिन की विधि कर पूर्ण लाभ उठा शकते हे

विधि - उस दिन सुबह से शाम तक नित्य के अनुसार केवल फलाहार पर ही रहना हे शाम को महा लक्ष्मी के सामने सोलह दीपक जलाने हे ( शुद्ध देशी घी के - ध्यान रहे यह दीपक रात्रि में चंद्रोदय के समय तक जलते ही रहने चाहिए ) बाद में नित्य पूजा करनी हे और उस समय आपको माता जी के सामने एक सूप में ( बास के बने सूप में ) सोलह वस्तुओ घर में ही माता जी के सामने ही भेट चढ़ानी हे  - आपको २ सूप लाने हे एक में सोलह वस्तुए रखनी हे दूसरा ऊपर ढकने के लिए ( यह चीजो की लिस्ट निचे दी गई हे )  बाद में आपको भोजन में  कमसे कम 5 वस्तु, 7 वस्तु, 11 वस्तु या सोलह वस्तु भोजन में बनाये - बाद में आपको अपने अपने शहर का चन्द्र उदय का समय ज्ञात कर लेना होगा - जब चन्द्र उदय हो जाए बाद में आपको छत पर या कही भी उत्तर दिशा की और मुह कर चन्द्र को जल अर्पण करना हे और महालक्ष्मी को अपने घर आने के लिए प्रार्थना करनी हे - यह प्रक्रिया के बाद अपने  घर में वापस आ कर जो भोजन की सोलह वस्तुए आपने भोजन की बनाई हे उन सभी की दो थाली भोजन तैयार करना हे - उनमेसे एक थाली आपको माता महालक्ष्मी को भोग लगानी हे और दूसरी थाली खुद को वही पूजा घर के सामने ही बैठ कर भोजन करना हे - और जो आपने माता जी के सामने भेट की वस्तु रखे हे वो पूरी रात भर वाही उनके सामने ही रहने दे - बाद में दुसरे दिन सुबह जो उनके सामने भोग लगाया था वो थाली गाय को खिलादे और जो भेट का सामान हे - वो नंगे पैर जा कर किसी महलक्ष्मी के मंदिर में भेट चढ़ा दे    

सोलह वस्तु ओ का लिस्ट ( आप अपनी पसंद से यहाँ कुछ और भी ला शकते हे - ध्यान रहे सभी सोलह चीजे सोलह सोलह ही लेनी हे  )

सोलह बिंदिया के पेकेट - सोलह काजल की डिब्बिया - सोलह कंगी - सोलह छोटे आईने - सोलह कुमकुम की डिब्बिया - सोलह लाल कलर की चुडिया - सोलह एक एक रूपये के सिक्के - सोलह इलायची - सोलह छोटी छोटी इत्र की शीशी - सोलह बादाम - सोलह छोटे छोटे रुमाल - सोलह फुल दार लॉन्ग - सोलह रिबन ( जो शिर में बालो को बाँधने के लिए इस्तेमाल की जाती हे ) - सोलह कमल गट्टे - सोलह साबुत हल्दी के टुकड़े - सोलह छोटी छोटी चुनरी लाल कलर की

ध्यान रहे जो भी सामग्री और जरुरी बाते पहेले से तैयार कर ले

वोट्सएप फॉर एस्ट्रो टिप्स - 8485964964
मोबाइल फॉर कोलिंग - 9824162904

हरी ॐ तत्सत
ऋषि पंड्या - ज्योतिष विशारद
गांधीनगर गुजरात





 

Friday, August 15, 2014

जन्म पत्रिका एक अदभुत चमत्कार

डेली एस्ट्रो टिप्स

डेली एस्ट्रो टिप्स apps की लिंक निचे दे रहा हु । एंड्रॉइड फोन वाले यह लिंक से हमारी apps डाउनलोड कर शकते हे - खास तोर पर यह apps डाउनलोड करने के बाद उसे मोबाईल में लेफ्ट साइड पर निचे का बटन दबाकर रिफ्रेश करना जरुरी हे वर्ना उपडेट नहीं प्राप्त होगा- -  यह लिक कोपी कर के अपने मोबाइल के सर्च ब्राउजर में डाले और क्लिक करे और डाउनलोड करे

www.dropbox.com/s/sd3lrm0f4r8lu6z/Astro%20Tips%20-%20client%20link.apk?dl=0

हरी ॐ तत्सत्
ऋषि पंड्या - ज्योतिष विशारद
गांधीनगर गुजरात
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             जन्मपत्रिका - एक अदभुत चमत्कार

                         आप सोचते होंगे की ये कैसा चमत्कार - 
                                                  एक बार आजमाके देखे - मान जायेंगे
यक़ीनन यह सम्पूर्ण जन्मपत्रिका बनवाने के बाद आपको ज्योतिष के पास जाने की कभी भी जरुरत नहीं पड़ेगी ... 100 पतिशत गारंटी - यह पत्रिका आपके लिए अपना खुद का एक ग्रन्थ बन जाएगा ... हर तरह की समस्याओ के उपाय अप घर बैठे ही कर शकते हे

यह जन्म पत्रिका में आपको जीवन के सभी पहेलु पर विस्तार से फलादेश एवं और आनेवाली जीवन की सभी समस्याओ के उपाय सहित - वैदिक ज्योतिष और लालकिताब ज्योतिष दोनों का अदभुत संगम - 

रस. 1000/- सम्पूर्ण जन्मपत्रिका - ज्योतिष गणना एवं सम्पूर्ण फलादेश के साथ सम्पूर्ण जीवन भर के उपाय सहित - pdf कॉपी ईमेल से प्राप्त होगी

वोट्सअप नंबर फॉर डेली  एस्ट्रो टिप्स – 84 85 964 964





हरी ॐ तत्सत
ऋषि पंड्या
गांधीनगर गुजरात
9824162904




Wednesday, March 26, 2014

स्त्री के सुहाग की रक्षा के लिए - मित्रो ये पोस्ट ज्यादा से ज्यादा शेर करे ...

स्त्री के सुहाग की रक्षा के लिए - मित्रो ये पोस्ट ज्यादा से ज्यादा शेर करे ... 

मित्रो कई स्त्री या मुझसे सवाल करती हे की बहोत व्रत हे जो पतिकी लम्बी उम्र के लिए हे पर कोई मन्त्र ऐसा हे जो हम नित्य कर ज्यादा और अच्छा लाभ उठा शकते हे - हाला की मेरा मन्ना हे की कोई स्त्री ऐसी होगी जो अपने पति की लम्बी उम्र नहीं चाहती होगी - कृपया चिंता मत करे एक अदभुत मन्त्र दे रहा हु यह मंत्र की नित्य ३ माला जो स्त्री करेगी उसके पति की हर प्रकार से रक्षा होगी और लम्बी आयु प्राप्त होगी - हो शके तो आप एक सौभाग्य यंत्र को घर में स्थापन करे और निचे दिया मंत्र की नित्य ३ माला करे अवश्य ही आपकी अभिलाषा पूर्ण होगी .....

मंत्र : " ॐ ॐ ह्रीं ॐ क्रीम ह्रीं ॐ स्वाहा ||

यह प्रयोग और मन्त्र की ऑडियो क्लिप सुनना चाहते हे तो आप मुझसे वोट्सअप पर ज्वाइन करे - 9824162904

हरी ॐ तत्सत
रेमेडियल एस्ट्रोलोजर ऋषि पंड्या
हेड ऑफिस - वड़ोदरा गुजरात
ब्रांच ऑफिस - गांधीनगर गुजरात
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*** अखूट लक्ष्मी दायक मणि ***

*** अखूट लक्ष्मी दायक मणि *** 

अब आप अपनी जेब को थोडा सा बड़ा कर लीजिए क्यों की आपके पास बहोत पैसे आनेवाले हे और जो सुख जो बड़े बड़े लक्ष्मी पति ( पैसे वाले ) लोगो के पास होता हे वो सुख अब आपके के पास भी होगा ,क्या आपका मकान नहीं बन रहा, क्या आपकी खुद की गाडी नहीं हे, शास्त्रों में बताया गया है की खास प्रकार के दो मणि का जोड़ा जिसे *** अखूट लक्ष्मी दायक मणि *** भी कहते हे वो जोड़ा जिसके पास होता हे वो कभी दरिद्र नहीं हो सकता धन की देवी लक्ष्मी और धन पति कुबेर की सदा पूर्ण कृपा रहती है जीवन में कम प्रयास के बावजूद भी अधिक सफलता प्राप्त होती है , व्यापार में रुकावट नहीं आती , सम्पूर्ण कर्ज मुक्ति, नोकरी में आमदनी की बढ़ोतरी, कभी कभी तो इसका प्रभाव इतना अधिक होता है की व्यक्ति असमंजस में पड जाता है की यह मेरे किस पुण्य का फल प्राप्त हो रहा है .. यह मणि से जीवन में कई प्रकार के बड़े योगो का फल मिलता हे जैसे – महा लक्ष्मी योग – गज केसरी योग – पूर्ण पुरुषोतम योग, मेरा मित्रो से नम्र निवेदन हे एक बार अवश्य ही इसका चमत्कार देखें ,अवश्य लाभान्वित होंगे किस्मत बार बार दस्तक नहीं देती, ... विशेष रूप से अगर यह मणि के जोड़े के साथ आपकी कुंडली के अनुसार धनदायक रत्न भी सामिल कर दिया जाए तो इसका फल १०० गुना बढ़ जाता हे

यह *** अखूट लक्ष्मी दायक मणि *** का जोड़ा सम्पूर्ण वैदिक रीती से सिद्ध कर आपको पहोचाया जायेगा और यह मणि के जोड़े को आपको सिर्फ अपने तिजोरी यानी की घर में लक्ष्मी रखने के स्थान पर रखना हे और बाद में देखे यह मणि का चमत्कार .. आपकी तिजोरी को हमेशा भरी हुई रक्खेगा ....

*** अखूट लक्ष्मी दायक मणि *** जोड़े का प्रसादी मूल्य सिर्फ Rs. 2100/-
अलग से आपकी कुंडली के अनुसार धनदायक रत्न प्रसादी मूल्य सिर्फ Rs. 900/-

हरी ॐ तत्सत
रेमेडियल एस्ट्रोलोजर ऋषि पंड्या
हेड ऑफिस – वड़ोदरा गुजरात
ब्रांच ऑफिस – गांधीनगर गुजरात
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काली हल्दी - मेरी स्वयं की अनुभूत १००% Guranteed

काली हल्दी - मेरी स्वयं की अनुभूत १००% Guranteed 

मित्रो यह एक ऐसी दिव्य वनस्पति है जो की बहोत ही रेयर पाई जाती है ..इस वनस्पति को हमे कई खतरनाक जंगले से प्राप्त करके लाना पड़ता है ..मित्रो इस जड़ी बूटी से आप का हर मकसद पूरा होगा,, .इस से तीव्र वशीकरण होता है इसे आप पूजा स्थल , धन की पेटी, तिजोरी ,या लाकर में रख सकते अगर आप धन की कमी महसूस कर रहे है तो हर रोज इसे धुप बत्ती दिखा कर इसका दर्शन कर इसका तिलक करके माथे पर घर से निकलना है आप का काम सिद्ध हो जायेगा ..

सावधान : मार्किट में आजकर डुप्लीकेट कलि हल्दी बहोत ही मात्र में उपलब्ध हे कृपया सोच समाज कर ही ख़रीदे ...

सिद्ध कलि हल्दी प्रसादी मूल्य सिर्फ 750/-

हरी ॐ तत्सत
रेमेडियल एस्ट्रोलोजर ऋषि पंड्या
हेड ऑफिस - वड़ोदरा गुजरात
ब्रांच ऑफिस - गांधीनगर गुजरात
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एक जादुई पत्थर - सफ़ेद अगेट

एक जादुई पत्थर - सफ़ेद अगेट

यह एक जादुई पत्थर हे पर ये असली होना आवश्क हे आज कल मार्किट में सस्ते डुप्लीकेट स्टोन बहोत से मिलते हे - शाश्त्र में कहा गया हे की यह सफ़ेद अगेट की अंगूठी या पेंडेंट बना कर धारण करने से सभी प्रकार से रक्षण होता हे और जब भी आप पर कोई मुसीबत आनेवाली होती हे तब ये एक घंटे पहले रत्न अपने आप ही फट जाता हे और आपको पता चल जाता हे की आप पर कोई मुसीबत या आपके साथ दुर्घटना होने वाली हे तो आप सावध हो शकते हे और आप आनेवाली तकलीफ से अपने आपको बचा शकते हे, यह स्टोन को शाश्त्र में लक्ष्मी दायक भी कहा गया हे - आकस्मिक धनप्राप्ति भी करवाता हे और आपको जीवन में सही राह दिखता हे ... यह पत्थर स्वयं सिद्ध होता हे, उसे कोई सिद्धि देने की आवश्यकता नहीं हे .. सिर्फ यह पत्थर को अपनी राशी के अनुसार योग्य मुहूर्त में धारण करने से उत्तम लाभ की प्राप्ति होती हे

सफ़ेद अगेट प्रसादी मूल्य सिर्फ Rs. 750/-

हरी ॐ तत्सत
रेमेडियल एस्ट्रोलोजर ऋषि पंड्या
हेड ऑफिस - वड़ोदरा गुजरात
ब्रांच ऑफिस - गांधीनगर गुजरात
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Thursday, January 23, 2014

सम्मोहन माला

सम्मोहन माला

यह माला जिसे वशीकरण माला भी कहते हे
यह धारण करने से एक गजब की दिव्य शक्ति प्राप्त होती हे
यह धारण करने से शुक्र और शनि जनित दोष की शांति होती हे
यह धारण कर ने से सर्वकार्य सिद्धि प्राप्त होती हे
यह धारण करने से स्वास्थ्य में सुधार आता हे
यह धारण करने से मानसिक प्रसन्नता होती हे
यह माला किसी भी प्रकार के जप के लिए उत्तम हे
यह माला को आप अपने घर में  ईस्ट देव की तस्वीर को चढ़ा कर उनकी कृपया प्राप्त कर शकते हे

हरी ॐ तत्सत

रेमेडियल एस्ट्रोलोजर ऋषि पंड्या 
हेड ऑफिस - वड़ोदरा गुजरात 
ब्रांच ऑफिस - गांधीनगर गुजरात 
9824162904

Friday, January 3, 2014

चमत्कारी इंद्रजाल

चमत्कारी इंद्रजाल 

चमत्कारी इंद्रजाल एक अद्भुत चमत्कारी तांत्रिक जड़ी है , जो की बड़ी ही कठिनाई से पहाड़ी और समुद्री जलीय स्थानों में मिलता है । किसी भी प्रकार की टोने , टोटको ,तांत्रिक प्रयोगों से रक्षा में ये अचूक कम करता है । अगर घर में भुत प्रेत का साया हे, या किसी ने कुछ करवा दिया हे ऐसी आशंका हे, अगर कोई बड़ी आपत्ति जैसे किसी ने आपकी व्यापर को बांध कर रक्खा हो, किसी ने किसी भी प्रकार से टोना टोटका किया हो, यह एक अदभुत तंत्र रक्षा कवच हे, तो इसे शिवजी के अघोर मंत्र से सिद्ध कर आपने घर या ऑफिस या दुकान में दीवाल पर रखने से सम्पूर्ण प्रकार से रक्षा होती हे यह जड़ी का असर आपको जीवन भर प्राप्त होगा इस दुर्लभ जड़ी को मांगने के लिए हमसे संपर्क करे । 

चमत्कारिक इंद्रजाल की तस्वीर यहाँ निचे दी गई हे

प्रसादी मूल्य मात्र – Rs.2100/-

मोबाइल नंबर - 9824162904

हरी ॐ तत्सत
रेमेडियल एस्ट्रोलोजर ऋषि पंड्या
हेड ऑफिस – वड़ोदरा गुजरात
ब्रांच ऑफिस – गांधीनगर गुजरा



सिद्ध जप माला

सिद्ध जप माला 

मित्रो आप सब जनते हे कोई भी मन्त्र करने के लिए एक जप माला की आवश्कता होती हे । परन्तु क्या आप ये जानते हे की यह माला शास्त्र के अनुसार सम्पूर्ण रूप से प्राण प्रतिष्टित और मंत्र से सिद्ध होनी आवश्यक हे अन्यथा किये गए जप का फल साधक को पूर्ण रूप से प्राप्त नहीं होता और साधक की महेनत व्यर्थ जाती हे ।।

परन्तु आप चिंता मत करे हमने आपके लिए वैदिक ब्रह्मिनो के द्वारा प्राण प्रतिष्टित और सम्पूर्ण रूप से मन्त्र शक्ति से चैतन्य युक्त कर तैयार की हे और इस माला का मुल्य भी बहोत सामान्य रक्खा गया हे । कोई भी व्यक्ति यह माला को घर बैठे ही प्राप्त कर शकता हे ।।

विशेष नोध । आपके नाम से प्राण प्रतिष्टित माला का उपयोग आप स्वयं ही करे किसी और को मत करने दे अन्यथा जप का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होगा ।।

सिर्फ आपको अपना ऑर्डर निचे दिए नंबर पर sms कर या कोल कर बुक करका शकते हे । sms करने वाले अपना पूरा पता एवं पिन कोड अवश्य लिखे ।।


सिद्ध जप माला की तस्वीर यहाँ निचे दी गई हे ....

Mo no। 9824162904

सिद्ध जप माला । प्रसादी मुल्य । Rs 201/-
पोस्टल चार्जिस एक्स्ट्रा । Rs 50/-

हरी ॐ तत्सत
रेमेडियल एस्ट्रोल्जर ऋषि पंड्या
हेड ऑफिस । वड़ोदरा गुजरात
ब्रांच ओफ़ीस । गांधीनगर गुजरात
9824162904



मेरु पुष्ट श्रीपर्णी यंत्र ( सेवन )

मेरु पुष्ट श्रीपर्णी  श्री यंत्र ( सेवन ) त्रिपुर सुन्दरी यन्त्र 


शिघ्र से अती शीघ्र लाभ देनेवाला चमत्कारिक और गुप्त मंत्रो से सम्पूर्ण सिद्ध किया गया श्रीपर्णी मेरु श्री यंत्र ।

यह एक दिव्य एवं चमत्कारिक वृक्ष हे । शास्त्र के अनुसार यह वृक्ष में साक्षात् श्री गणेश और देवी लक्ष्मी का वास हे । यह वृक्ष अगर 12 साल से अधिक पुराना हे तो ये स्वयं सिद्ध हे । यह वृक्ष के लकड़े में से बने श्री यंत्र की स्थापना मात्र से ही घर में लक्ष्मी का आगमन शुरू हो जाता हे और घर में सुख समृद्धि आने लगती हे ।।

मित्रो हमने यह दिव्य वृक्ष के लकड़े में से मेरु पुष्ट श्री यंत्र तैयार करवाए हे और उसे सम्पूर्ण रूप से लक्ष्मी मंत्रो से चैतन्य युक्त किया हे । इसे घर में स्थापना मात्र से ही लक्ष्मी का आगमन शुरू हो जाता हे ।

यह दिव्य यंत्र को स्थापन करने जे लाभ -

शीघ्र लक्ष्मी लाभ होगा
घर में वास्तु दोष निवारण होगा
घर में कलेश शांती होगी
सुख समृद्धि बढ़ेगी
आरोग्य प्राप्ति होगी
ये यंत्र अष्टसिद्धि दायक हे

यह यंत्र को खास तोर पर कर्ज मुक्ति मन्त्र को लक्ष्मी मन्त्र का सम्पुट दे कर सिद्धि प्रदान की हे चाहे कैसा भी कर्ज हो जल्द ही उतर जाएगा ।।


यह यंत्र आप अपनी दूकान । घर या ऑफिस में रख कर लाभ उठा शकते हे ।

यह यंत्र आपको 5" बाय 5" की बड़ी साइज में ही पाप्त होगा । यंत्र की गुप्त पूजन विधि यंत्र के साथ ही प्राप्त होगी ।।

यह यंत्र की तस्वीर हमने यहाँ साथ में यहाँ निचे  हे कृपया देखे ।

तो आज ही अपना श्रीपर्णी मेरु श्री यंत्र बुक करवाए ।।

यंत्र प्रसादी मुल्य Rs 2100/-
भारत में पोस्टल चर्जिस प्रति यंत्र Rs 150/- अलग से देना होगा

लिमिटेड स्टोक ओन्लि

हरी ॐ तत्सत
रेमेडियल एस्ट्रोल्जर ऋषि पंड्या

 हेड ऑफिस । वड़ोदरा गुजरात
ब्रांच ऑफिस । गांधीनगर गुजरात

9824162902


Tuesday, December 10, 2013

सर्व सिद्धि कर मन्त्र साधना

सर्व सिद्धि कर मन्त्र साधना 
हर कोई व्यक्ति चाहता हे की उसके सभी कार्य सफल हो और जीवन में सभी प्रकार से सिद्धि प्राप्त हो । यहाँ में एक अदभुत और चमत्कारिक मन्त्र दे रहा हु । आप चाहे तो सम्पूर्ण रूप से लाभ उठा शकते हे 

मन्त्र : " ॐ ह्रीं अम्बिके उज्जयंत निवासिनी सर्व कल्याणकरिणी ह्रीं नमः "

विधि : अम्बाजी की तस्वीर के सामने लाल वस्त्र धारण कर लाल पुष्प चढ़ा कर लाल चन्दन की माला से नित्य सिर्फ एक माला करनी ही । 108 दिन के बाद ये मन्त्र सिद्ध हो जायेगा और अवश्य ही यह मन्त्र के प्रभाव से सर्व कार्य सिद्धि प्राप्त होगी

हरी ॐ तत्सत
रेमेडियल एस्ट्रोलोजर ऋषि पंड्या
हेड ऑफिस । वड़ोदरा गुजरात
ब्रांच ऑफिस । गांधीनगर गुजरात
9824162904

अंक शाश्त्र और आप

 अंक शाश्त्र और आप 
प्रणाम दोस्तों

आज में आपको अंक ज्योतिष के अनुसार कुछ उपाय देने जा रहा हू : वैसे ये कोई शास्त्र में नहीं लिखा हे परन्तु मेरे २० साल के तजुर्बे और आजमाइस का नतीजा हे : मेने यहाँ तक खोजा हे की आपके जन्म किस समय पर हुआ हे - किस होरा में हुआ हे - किस नक्षत्र नाडी में हुआ हे - उस पर से उपाय कर भी जीवन में सफलता प्राप्त कर शकते हे : परन्तु में यहाँ आपको सिर्फ आपका जन्म कोंसी तारीख कोई हुआ हे और क्या उपाय करने से सफलता प्राप्त होगी :

मित्रों ध्यान रहे यहाँ १ तारीख का मतलब जो लोगो का जन्मांक १ हे यानी १९ तारीख को हे वो १ तारीख उपाय देख शकते हे और जो लोगो का जन्म २२ तारीख को हुआ हे वो लोगो का जन्म ४ यानी ४ तारीख का उपाय कर शकते हे ....

१ तारीख : को जो लोग जन्मे हे उनको नित्य गायत्री मंत्र की ३ माला अवश्य करनी चाहिए और साथ में अखूट लक्ष्मी प्राप्ति के लिए त्रिपुरा लक्ष्मी कवच धारण करना चाहिए ||

२ तारीख : को जो लोग जन्मे हे उनको नित्य ओम् नमः शिवाय मंत्र की ३ माला अवश्य करनी चाहिए और साथ में अखूट लक्ष्मी प्राप्त करने के लिए : शक्ति लक्ष्मी कवच वैदिक रीती से बनवाकर गले में धारण करना चाहिए ||

३ तारीख : को जो लोग जन्मे हे उनको नित्य प्रातः काल ओम् नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र की ३ माला करनी चाहिए और : साथ में अखूट लक्ष्मी प्राप्ति के लिए नारायण लक्ष्मी कवच वैदिक रीती से बनवा कर गले में धारण करना चाहिए ||

४ तारीख : को जो लोग जन्मे हे उनको नित्य प्रातः काल ओम् दुम दुर्गाय नमः मंत्र की १ माला करे और साथ में अखूट लक्ष्मी प्राप्ति के लिए प्राण लक्ष्मी कवच वेदोक्त रीती से बनवाकर गले में धारण करना चाहिए ||

५ तारीख : को जो लोग जन्मे हे उनको नित्य प्रातः ओम् गंग गणपतये नमः मंत्र की ५ माला अवश्य करनी चाहिए और साथ में अखूट लक्ष्मी प्राप्ति के लिए सौम्य लक्ष्मी कवच वैदिक रीती से बनवाकर गले में धारण करना चाहिए ||

६ तारीख : को जो लोग जन्मे हे उनको नित्य सायकाल " ओम् एम ह्रीं कलीम चामुण्डाये विच्ये " मंत्र की १ माला अवश्य करनी चाहिए और साथ में अखूट लक्ष्मी प्राप्ति के लिए श्री चक्र कवच वैदिक रीती से बनवाकर गले में धारण करना चाहिए ||

७ तारीख : को जो लोग जन्मे हे उनको नित्य सुबह शिव् पंचाक्षर सोत्र अवश्य करना चाहिए और साथ में अखूट लक्ष्मी प्राप्ति के लिए वैश्य लक्ष्मी कवच वैदिक रीती से बनवाकर गले में धारण करना चाहिए ||

८ तारीख : को जो लोग जन्मे हे उन्हें नित्य " ओम् शंग शंकराय नमः " मंत्र की १ माला अवश्य करनी चाहिए और साथ में अखूट लक्ष्मी प्राप्ति के लिए मंदार लक्ष्मी कवच वैदिक रीती से बनवाकर गले में द्खारण करना चाहिए ||

९ तारीख : को जो लोग जन्मे हे उन्हें नित्य ७ हनुमान चलिषा अवश्य करनी चाहिए और साथ में अखूट लक्ष्मी प्राप्ति के लिए सौर्य लक्ष्मी कवच वैदिक रीती से बनवाकर गले में धारण करना चाहिए ||

मित्रो अगर आप यह कवच प्राप्त करना चाहते हे तो कृपया आप हमारे कार्यालय का संपर्क कर शकते हे यह कवच आपको सम्पूर्ण रूप से सिद्ध कर आप तक पहोचाया जायेगा 


रेमेडियल एस्ट्रोलोजर ऋषि पंड्या : वड़ोदरा : गुजरात
मुद्रा ज्योतिष कार्यालय
Cont : 9824162904

ऋषि वाणी - मेरी कलम से

ऋषि वाणी । मेरी कलम से
स्वस्थ सुखी रहने के सर्वसुलभ उपाय:-

आज मनुष्य स्वास्थ और सुख की चाह में भटकता फिर रहा है फिर भी उसकी इच्छा पूरी नहीं होती । यहां स्वस्थ सुखी रहने के कुछ आसान तरीके बताए गए है, जिसमें न किसी गुरु की आवश्यकता है, न ही कहीं भटकने की, न ही कोई पैसा खर्च करने की, न ही किसी ज्ञान की, न ही समय की और न कुछ करने की, बस थोड़ा सा अपनी दिनचर्या में परिवर्तन कर अपनी सोच को बदलें और स्वस्थ सुखी दीर्धायु जीवन व्यतीत करें।

१. अपनी कमाई से कम में अपना निर्वाह करना सीखें कमाई का एक तिहाई प्रतिमाह बचाने का प्रयास करें। कभी कर्ज न लें, न ही किसी से प्रतिस्पर्धा करें अपनी परिस्थिति से हमेशा संतुष्ट रहें।

२. नियमित दिनचर्या अपनायें चाहे कार्य दिवस हो या छुट्टी का दिन दिनचर्या न बदलें प्रयास करें कि इसमें कभी पांच मिनिट का भी फर्क न आए (यदि साल में एक दो बार कोई बाधा आती तो इससे कोई फर्क नही पड़ेग) । २-३ माह ही नियमित प्रयास करना होता है इसके बाद जीवन भर के लिए यह आदत में बदल जाता है।

३. सुबह ब्रह्म मुहूर्त (सुबह ४ से ७ गर्मी में, सुबह ५ से ८ ठंड में) उठकर शौच स्नान आदि से निवृत हो कम से कम १५-२० मिनिट ईश्वर या इष्ट की आराधना अवश्य करें। इसके लिए इष्ट के सामने शुद्ध घी का दीपक और मन पसंद धूप बत्ती जलाकर शांत मन से बैठकर पूजा आराधना करें, हो सके तो एक माला गायत्री मंत्र का जप करें। इससे आप दिन भर तरोताजा महसूस करेगें आलस और थकान महसूस नहीं होगी।

४. भोजन ईश्वर का प्रसाद है यह जीने के लिए आवश्यक है हमेशा इसी उद्देश्य से भूख से कुछ कम सात्विक भोजन करें। भोजन पर कोई टिप्पणी न करें। इस धारणा से भोजन करने वाले को “कि हम जितना अधिक और पौष्टिक भोजन करेंगें उतने ही ताकतवर बनेगें” उनको भोजन खा जाता है। आप दिन भर में जितना केलोरी खपत कर सकते है उतना ही खाएं। दूध मलाई खाकर एसोआराम करने वालों से सूखी रोटी खाकर मेहनत करने वाले ज्यादा ताकतवर होते हैं।

५. समस्त जगत को ईश्वर का रूप मानकर श्रृद्धा पूर्वक व्यवहार करें।यदि आप मंदिर में जाकर मूर्ति की पूजा करते हैं और बाहर आकर कुत्ते
को डंडा मारते हैं तब आपने पूजा भी ईश्वर की और डंडा भी ईश्वर को मारा इसका अच्छी तरह ध्यान रखें। प्रकृति, वनस्पिति, जीव जन्तु, एवं मानवीय संबंधों को स्वार्थ, भौतिक सुख सुविधा, धन एवं संपत्ति से अधिक महत्व दें। कोई ऐसा काम न करें जिससे किसी को दुख पहुंचे या किसी की कोई हानि हो ।

६. घर के समस्त कार्य स्वयं करें नौकरों के भरोसे न रहें। अपने बच्चों को भूलकर भी नौकरों के भरोसे न छोड़े। वर्तमान समय में यह
बिलकुल उपयुक्त नहीं। यदि आप उपरोक्त सरल नियमों का पालन कर सकते हैं तो जीवन भर स्वस्थ सुखी और निश्चिंत जीवन व्यतीत कर सकते हैं।

हरी ॐ तत्सत
रेमेडियल एस्ट्रोलोजर ऋषि पंड्या
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वास्तु शास्त्र - मेरी कलम से

वास्तु शाश्त्र – मेरी कलम से 
वास्तु शाश्त्र के सिद्धांत के अनुसार अगर जो मकान बनाया जाये तो उनमे रहें वाले व्यक्ति के जीवन में खुशहाली, समृद्धि और उन्नति आती हे | आज हम बात करेंगे मकान की मुख्य दरवाजे की – मकान में मुख्य दरवाजे की बहोत ही महत्त्व पूर्ण भूमिका होती हे | 

वास्तुशाश्त्र के अनुसार मकान का मुख्य द्वार किस दिशा में लगाया हे उस पर से गृह स्वामी को शुभाशुभ फल की प्राप्ति होती हे | अगर घर में शुभ दिशा में द्वार हे तो घर के सभी सदस्य को शुभ फल की प्राप्ति होगी और अगर अशुभ दिशा में हे तो अवश्य ही अशुभ फल की प्राप्ति होगी | आप चाहे तो घर में मुख्य द्वार की दिशा जन कर उसमे बदलाव ला कर शुभ फल की प्राप्ति कर शकते हे

यहाँ में द्वार की दिशा के अनुसार फल का वर्णन कर रहा हु – कृपया लाभ उठाये

पूर्व दिशा - शुभ द्वार, उच्च विचारों की प्राप्ति और शुभता की प्राप्ति
पूर्व ईशान – सर्व श्रेष्ठ और सौभाग्यदायक
पूर्व अग्नि – अशुभ, वैचारिक मतभेद, बार बार चोरी होना, संतान के लिए कष्ट कारी
पश्चिम वायव्य - सर्व कार्य के लिए शुभदायक
पश्चिम नैरुत्य – अशुभ, आर्थिक परेशानी, घर के मुख्य व्यक्ति के लिए ज्यादा अशुभ
उत्तर इशान – शुभ श्रेष्ठ, आर्थिक सफलता
उत्तर वायव्य – अशुभ, धनहानि, चंचलता, तनाव में वृद्धि
दक्षिण अग्नि – शुभ, आर्थिक लाभ, स्वास्थ्यदायक
दक्षिण नैरुत्य – अशुभ, आर्थिक विनाश, गृहिणी के लिए कष्टप्रद
पश्चिम – शुभ फलदायक
उत्तर – अत्यंत शुभ फलदायक

यहाँ उल्लेख हे की पूर्व ईशान मतलब इशान कोने में जो दरवाजा हे जो जिसका मुख पूर्व दिशा में हे उशे पूर्व ईशान कहते हे : अतः आपको उसी प्रकार आपको बाकि दिशाओ के लिए समजना हे

और अगर आपका द्वार गलत दिशा में हे तो कृपया वहा द्वार दोष निवारण यन्त्र स्थापित करे और सम्पूर्ण रूप से लाभ उठाये

हरी ॐ तत्सत
रेमेडियल एस्ट्रोलोजर ऋषि पंड्या
हेड ऑफिस – वड़ोदरा गुजरात
ब्रांच ऑफिस – गांधीनगर गुजरात
Contact - 9824162904

नवग्रह यन्त्र



गोल्ड प्लेटेड नवग्रह यन्त्र 

यह यन्त्र प्रतियोगिता – क़ानूनी मसले और दुश्मनों पर विजय दिलाता हे
यह गोल्ड प्लेटेड नवग्रह यन्त्र सम्पूर्ण रूप से नो ग्रहों के आशीर्वाद हे
नवग्रह ज्योतिष के अनुसार अवकाशीय मंडल का प्रतिनिधित्व करते हे और उनका प्रभाव सम्पूर्ण रूप से सप्ताह के सतो दिनों पर रहता हे और यह यन्त्र के माध्यम से किसी के भी जीवन को प्रभावित किया जा शकता हे |

यह नवग्रह यन्त्र की पूजा से हमारी कुंडली के लाभकारी ग्रहों को मजबूत और उनके सकारात्मक प्रभाव को बढाती हे और कुंडली के हानिकारक ग्रहों के नकारात्मक प्रभाव को संतुलित करता हे क्यों किये अत्यधिक उपयोगी और लाभकारी गोल्ड प्लेटेड नवग्रह यन्त्र हे


नवग्रह यंत्र में मुख्य लाभ

• ९ ग्रहों के अशुभ प्रभावों से बचाता हे
• आपके जीवन में सम्पूर्ण सफलता दिलाके आपको खुश करता हे
• आपके सोहरत बढ़ता हे और आपको प्रसिद्द बनता हे
• आपके घर के वातावरण से नकारात्मक उर्जा को निकलता हे
• यह यंत्र आप पर डाली गई सब बुरे को निकलता हे
• आपको स्वास्थ्य और धन देता हे
• आपको सम्पूर्ण रूप से मानसिक शांति प्रदान करता हे
• वैवाहिक जीवन में सम्पूर्ण रूप से सफलता प्राप्त करवाता हे

अब ये गोल्ड प्लेटेड यंत्र आप घर बैठे ही मंगवा शकते हे
यह यन्त्र आपको नवग्रह के सवा लाख मंत्रो के साथ अभिमंत्रित कर के होम कर आप तक पहोचाया जायेगा 

यह यन्त्र की साइज ६ बाय ६ इंच रहीगी और यह यंत्र को किस प्रकार रखना हे और किस प्रकार उसका पूजन करना हे यह सम्पूर्ण रित आपको यंत्र के साथ ही प्राप्त होगी ||

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हरी ॐ तत्सत
रेमेडियल एस्ट्रोलोजर ऋषि पंड्या
हेड ऑफिस – वड़ोदरा गुजरात
ब्रांच ऑफिस – गांधीनगर गुजरात
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वशीकरण कवच यन्त्र


वशीकरण कवच

आकर्षक व्यक्तित्व के निर्माण का एक सरल एवं आध्यात्मिक उपाय

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हरी ॐ तत्सत
रेमेडियल एस्ट्रोलोजर ऋषि पंड्या
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Thursday, April 5, 2012

एक चमत्कारिक जन्मपत्रिका जिसमे आपजो जीवन की हर समस्या का समाधान मिलेगा ( एक नया कदम जो हर दम सफलता देगा )

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          एक चमत्कारिक जन्मपत्रिका

      जो आपको सफलता के शिखर पर बिठा देगा 

 लाल किताबकुंडली - वैदिक कुंडली और अंकज्योतिष के   
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क्या इतनी सारी जानकारी और जीवन भर के उपाय आपको कही मिल शकते हे ? कम से कम एक बार निन्म विगत अवश्य पढ़े सायद आपको कुछ ऐसा मिले जिसकी आपको बरसों से तलाश थी ... !!!!!!!!!!!!!
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    लाल किताब कुंडली – वैदिक कुंडली और अंकज्योतिष के अनुसार यह सम्पूर्ण पत्रिका में आपको क्या मिलेगा और उसका उपयोग कैसे करे और लाभ कैसे पाए || यहाँ आपको लालकिताब कुंडली के साथ फलादेश और उपाय के साथ वैदिक कुंडली के फलादेश और उपाय प्राप्त होंगे || लालकिताब एक ज्योतिष का महान ग्रन्थ हे जो सम्पूर्ण रूप से ज्योतिष और उसके उपायों के लिए प्रचलित हे || आप सभी जनते हे की कुंडली में काफी बड़े बड़े अच्छे और बुरे योग होते हे और बुरे योगो के लिए बड़े बड़े विधान करना आम आदमी के लिए थोडा मुश्किल होता हे, यहाँ लालकिताब और वैदिक ज्योतिष के अनुसार आपको चाहे कैसा दोष हे आप उसके छोट छोट उपाय कर अपने जीवन में सम्पूर्ण रूप से सफलता प्राप्त कर शकते हे ||

यहाँ यह लालकिताब कुंडली में शुरु मे आपको ज्योतिष सारणी के साथ लालकिताब कुंडली और कुछ अन्य कुंडली प्राप्त होगी ज्योतिषीय गणना के लिए जरुरी हे. जातक के बारे में लालकिताब के अनुसार सामान्य जानकारी – फलादेश | सभी भाव में बैठे हुये ग्रह ( सभी ग्रहों का अलग अलग ) का फलादेश और ग्रह के अशुभता शुभता में बदलने के लिए उपाय और जीवन में रखने योग्य सावधानिया | विशेष रूप से लालकिताब का ग्रह फल और उपाय और परहेज | लालकिताब से जीवन के विभिन्न पहलुओ से सम्बंधित कारण और उपाय – शिक्षा से सम्बंधित भिवष्यवाणी और उपाय – स्वास्थ्य से समबंधित कुछ महत्वपूर्ण योग और उपाय – धन व्यापार रोजगार से सम्बंधित कुछ महत्वपूर्ण योग और उपाय – लालकिताब से मकान के सम्बंधित योग सावधानिय एवं नियम – विवाह, स्त्री और गृहस्थ-सुख से सम्बंधित कुछ महत्वपूर्ण योग और उपाय – संतान से सम्बंधित भविष्यवाणी और उपाय – आपकी कुंडली में यात्रा से सम्बंधित कुछ महत्वपूर्ण योग और उपाय – लालकिताब से अन्य महत्वपूर्ण भाविश्फल – अंधे ग्रहों की कुंडली फलादेश – आधे अंधे ग्रहों की कुंडली फलादेश – धर्मी टेवा कुंडली फलादेश – नबालीग टेवा कुंडली फलादेश - लालकिताब से राजयोग का फल – लालकिताब से ऋण और उसके उपाय – लालकिताब में वर्जित और अवर्जित उपाय – लाकिताब से एक साथ बैठे उए ग्रहों का फल – लालकिताब से गोचर शनि साडेसाती और ढाई साल की पनोतीका फल और उपाय – लालकिताब में विशोतरी दशा में १२० वर्ष का फलादेश और सभी महा एवं अंतर दशा के उपाय – विशेष रूप से निन्म फलादेश भी यहाँ प्राप्त होगा   आपके ग्रहों के अनुसार आपकी शारीरिक संरचना – आपकी मानसिक स्थिति – आपके गुण अवगुण – आपके विशेष लक्षण – आपका रोजगार – आपके लिए शुभ एवं अशुभ ग्रह – कुंडली  में लागु हो रहे धन योग की विस्तृत जानकारी – कुंडली में लागू हो रहे अनिष्ट योग की जानकारी – जन्मकालीन संवास्तर का विशेष रूप से विवरण – जन्मकालीन सौर अयन का भविष्यफल – जन्म कालीन रुतुचक्र का भविष्य फल – जन्मकालीन पक्ष का भविष्य फल – जन्म कालीन दिन का भविष्य फल – दिन या रत के जन्म का भविष्य फल – जन्म कालीन सूर्यसिद्धान्त योग का भविष्य फल – जन्म कालीन तिथि का भविष्य फल – जन्म कालीन करण का भविष्य फल – जन्म कालीन नक्षत्र का भविष्य फल – जम कालीन लग्न का भविष्य फल – जन्म कालीन होरा का भविष्य फल – जन्म कालीन देष्काण का भविष्य फल – जन्म कालीन प्राण पद के भविष्यफल – जन्म कालीन गुलिक से भविष्य फल – जन्म कालीन देह राशि से भविष्य फल – जन्म कालीन गण से भविष्य फल – जन्म कालीन वर्ण से भविष्य फल – जन्म कुंडली के आधार पर शारीर के विभिन्न अंगों का विश्लेषण जैसे – शारीर की बनावट – कद काठी और त्वचा का रंग – संभावित कद का अनुमान वयस्क होने पर – शारीर के स्थूल काय होने का अनुमान वयाश्क होने पर – जीभ दन्त और बोलने की क्षमता का भविष्यफल – बाहे हाथ और कंधे की संचरचना का भविष्यफल – ह्रदय और पीठ की स्थिति का अनुमान – उदार पेट और पाचन किर्या का भविष्यफल – शारीर के ग्राही, अवशोषि और उत्सर्गी अंगों का भविष्यफल – जांघ, गुटनो, टांगो और पंजो का अनुमान  शिक्षा की सम्भावना की जाँच जैसे शिक्षा में बाधाओ का भविष्यफल – अनोपचारिक शिक्षा – लिखावट का भविष्यफल – बुद्धि मेधा और योग्यता का भविष्यफल – उच्च शिक्षा के योग और भविष्यफल – व्यवसाय रोगगार की संभावनाओ की और भविष्य फल – आपके ग्रहों के अनुसार आपके विवाह और वैवाहिक जीवन का भविष्य फल – जातक के बारे में स्वास्थ्य और बीमारियो के बारे में सम्पूर्ण विश्लेषण – आपके ग्रहों के अनुसार यात्रा भ्रमण और विदेश योग का भविष्यफल आपके ग्रहों के अनुसार शुभ दिशा का चुनाव  -  जन्म समय की कुंडली के अनुसार कुछ महत्वपूर्ण योग – सफल काम योग – योग – सत कलत्र योग – तीव्र बुद्धि योग – दामिनी योग – जन्म कालीन नवग्रहों  की स्थिति से भविष्य फल - लालकिताब के अनुसार कुंडली में कालसर्प हे या नहीं और उसका उपाय – लालकिताब के अनुसार मांगलिक दोष और उपाय – अंकशास्त्र के अनुसार रत्न मंत्र यन्त्र रुद्राक्ष और उपाय  और भी अंक ज्योतिष बहोत सारी जानकारी जैसे आपके लिए कोनसा देश और कोनसा शहर लाभदाई हे और बहोत कुछ – वैदिक कुंडली और वैदिक फलादेश और साथै में वैदिक रीती से सम्पूर्ण जीवन भर की साडेसाती का फलादेश और उपाय – आपकी कुंडली के अनुसार उपयुक्त रत्न का सुजाव – योग करक ग्रह के रत्न का सुजाव – जन्म राशि के आधारित रुद्राक्ष का सुजाव – रुद्राक्ष धारण करने की विधि सहित – आखिर में लालकिताब का गोचर वर्ष फल और शुभ और अशुभ ग्रहों के उपाय कर अपने वर्ष को सफलता दायक बनाये |

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मुद्रा ज्योतिष कार्यालय – वड़ोदरा – गुजरात
रेमेडियल एस्ट्रोलोजर ऋषि पंड्या – Mob : 9824162904



Tuesday, July 27, 2010

व्यक्ति गत मार्गदर्शन हेतु उपयोग में लाये




We cannot change the circumstances in which our soul chose to be born, but we can definitely change the circumstances in which we grow.
हर समस्या का समाधान संभव नहीं हे, बहोत ही कम ऐसी समस्याये हे जिनका समाधान कर शकते हे .. यहाँ सभी लेख अलग अलग सूत्रों और माध्यम से प्राप्त हुए हे - यदि कोपीराइट भंग होता हो तो माफ़ कर दे ... हमारा उद्येश मात्र आम जानता के लाभार्थ ही हे .....


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श्रीयंत्र को यंत्रराज क्यों कहते हे ?    Date : 17-03-2012
प्रणाम दोस्तों 


ज्यादातर लोग श्रीयंत्र को लक्ष्मी प्राप्ति का ही माध्यम समजते हे परन्तु श्रीयंत्र अपने आप में सारे संसार का सुख देने में सामर्थ्य रखता हे | एक पौराणिक खाता के अनुसार लक्ष्मी जी पृथ्वी से रुष्ट हो कर वैन्कुठ चली गई | तो लक्ष्मीजी की अनुपस्थिति में पृथ्वी पर अनेक समस्याए उत्पन्न होगई तब महर्षि वशिष्ठ और श्री विष्णु ने लक्ष्मीजी को बहोत मनाया फिर भी लक्ष्मी जी नहीं मानी तब जाके देवगुरु बृहस्पति ने एक उपाय किया, लक्ष्मीजी को आकर्षित करने के लिए श्रीयंत्र की रचना की और उसका स्थापन और पूजन का उपाय बताया | तब जाके लक्ष्मीजी को न चाहते हुवे भी विवश हो कर पृथ्वी पर आना पड़ा क्यों की - लक्ष्मीजी ने अपने स्वयं के मुख से कहा " श्रीयंत्र ही मेरा आधार हे और यही श्रीयंत्र में मेरी आत्मा निवास करती हे इस लिए मुझे आना ही पड़ा "


एक अन्य कथा में श्रीयंत्र का सम्बन्ध आध्यशंकराचार्य से जोड़ा गया हे | एक बार विश्व में बहोत परेशानी व्याप्त हो गई तब आध्यशंकराचार्य जी ने आशुतोष शिवजी से विश्वकल्याण के लिए उपाय पूछा तो शिवजी ने श्रीयंत्र और श्रीविद्या प्रदान करते हुवे कहा की श्रीविद्या की साधना जाननेवाला मनुष्य अपर यश और लक्ष्मी का स्वामी होगा जबकि श्रीयंत्र का पूजन करने वाला प्रत्येक प्राणी सभी देवताओ की आराधना का फल प्राप्त करेगा क्यों की इस यंत्र राज " श्रीयंत्र " में सभी देवी देवताओ का वास हे .... हरी ओम तत्सत

मेरे सभी दोस्तों से मेरा नम्र निवेदन हे की हो शके तो जीवन में एक बार सम्पूर्ण रूप से श्रीविद्या के तहद एक श्रीयंत्र वैदिक रीती से बनवाकर अपने घर में स्थापन करे और यह श्री यन्त्र का नित्य वैदिक पूजन करे और हवन द्वारा देवताको को भोग प्रदान करे .. अवश्य ही लक्ष्मी की महेर होगी .. मेरा स्यवंम का अनुभव हे ... कृपया लाभ उठाये 

रेमेडियल एस्ट्रोलोजर ऋषि पंड्या - वड़ोदरा - गुजरात



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आज से शारदीय नवरात्री आरम्भ हो रही हे मेरे सभी बंधू ओ से मेरा नम्र निवेदन हे - कृपया आप हो शके तो यह नवरात्री में शक्ति की उपासना कर अपने आप को धन्य बनाये - रक सरल तरीका माँ की उपासना का - मूल मन्त्र की रोज ९ माला सुबह शाम अवश्य करे

नवरात्र के प्रथम दिन जगदम्बा का प्रथम स्वरूप देवी शैलपुत्री की पूजा होती है l लोक मान्यता है कि देवी शैलपुत्री अगर खुश हो जाएँ तो जमीन-जायजात और मान सम्मान में बढ़ोत्तरी होती है | माँ भवानी जगदम्बा का पहला रूप माँ शैलपुत्री है | माँ शैलपुत्री शक्ति कि देवी, शक्ति का स्वरुप हैं | माँ शैलपुत्री वो देवी हैं जिनके नाम मात्र से बड़े बड़े राक्षस काँप उठे है | देवी शैलपुत्री की उपासना से समस्त संसार को वश में किया जा सकता है | वो शैलपुत्री जिनके सामने इस संसार में कोई ऐसा नहीं जो टिक सके | माँ शैलपुत्री हिमालय कि बेटी हैं इसीलिए इनका नाम पड़ा शैलपुत्री | शैलपुत्री को हिमालय कि तरह ही शक्ति का स्वरुप माना जाता है | माँ का शैलपुत्री स्वरुप मानवों को पर्यावरण संतुलन की ओर प्रेरित करता है l प्रकृत की रक्षा की ओर अग्रसर करता है |

मूल मन्त्र : ओम एम ह्रीं कलीम चामुण्डाये विच्ये

यह मन्त्र को किस प्रकार बोलना हे निचे दिए गई क्लिप को ओन करे











Wednesday, July 7, 2010

शिव महिमा स्तोत्र

शिव महिमा स्तोत्र
महिम्नः पारं ते, परमविदुषो यज्ञसदृशी
स्तुतिर्ब्रह्मादीना मपि तदवसन्नास्त्वयि गिरः ।
अथावाच्यः सर्वः स्वमतिपरिणामधि गृणन्
ममाप्येषः स्तोत्रे हर निरपवादः परिकरः ॥१॥
अतीतः पंथानं तव च महिमा वाड् मनसयो
रतद्व्यावृत्यायं चकितमभिधत्ते श्रुतिरपि ।
स कस्य स्तोतव्यः कतिविधगुणः कस्य विषयः
पदे त्वर्वाचीने पतति न मनः कस्य न वचः ॥२॥
मधुस्फीता वाचः परमममृतं निर्मितवत
स्तव ब्रह्मन्किं वा गपि सुरगुरोर्विस्मयपदम् ।
मम त्वेतां वाणीं गुणकथनपुण्येन भवतः
पुनामीत्यर्थेस्मिन् पुरमथनबुद्धिर्व्यवसिता ॥३॥
तवैश्चर्यें यत्तद् जगदुदयरक्षाप्रलयकृत
त्रयी वस्तु व्यस्तं तिसृषु गुणभिन्नासु तनुषु ।
अभव्यानामस्मिन् वरद रमणीयामरमणीं
विहंतुं व्योक्रोशीं विदधत इहै के जडधियः ॥४॥
किमिहः किंकायः स खलु किमुपायस्त्रिभुवनं
किमाधारो धाता सृजति किमुपादान इति च ।
अतकर्यैश्वर्येत्वय्यनवसरदुःस्थो हतधियः
कुतर्कोडयंकांश्चि न्मुखरयति मोहाय जगतः ॥५॥
अजन्मानो लोकाः किमवयवंवतोडपि जगता
मधिष्ठातारं किं भवविधिरनादत्य भवति ।
अनीशो वा कुर्याद भुवनजनने कः परिकरो
यतो मंदास्त्वां प्रत्यमरवर संशेरत इमे ॥६॥
त्रयी सांख्यं योगः पशुपतिमतं वैष्णवमिति
प्रभिन्ने प्रस्थाने परमिदमदः पथ्यमिति च ।
रुचीनां वैचित्र्या दजुकुटिलनानापथजुषां
नृणामेको गम्य स्त्वमसि पयमामर्णव इव ॥७॥
महोक्षः खड्वांगं परशुरजिनं भस्म फणिनः
कपालं चेतीय त्तव वरद तंत्रोपकरणम् ।
सुरास्तां तामृद्धिं दधति तु भव द्भ्रूप्रणिहितां
नहि स्वात्मारामं विषयमृगतृष्णा भ्रमयति ॥८॥
ध्रुवं कश्चित्सर्वं सकलमपरस्त्वद्ध्रुवमिदं
परो ध्रोव्याध्रोव्ये जगति गदति व्यस्तविषये ।
समस्तेडप्येतस्मि न्पुरमथन तैर्विस्मित इव
स्तुवंजिह्रेमि त्वां न खलु ननु धृष्टा मुखरता ॥९॥
तवैश्वर्यं यत्ना द्यदुपरि विरिंचिर्हरिरधः
परिच्छेतुं याता वनलमनलस्कंधवपुषः ।
ततो भक्तिश्रद्धा भरगुरुगृणद्भ्यां गिरिश यत्
स्वयं तस्थे ताभ्यां तव किमनुवृत्तिने फलति ॥१०॥
अयत्नादापाद्य त्रिभुवनमवैरव्यतिकरं
दशास्यो यद्बाहू नभृन रणकंडुपरवशान् ।
शिरःपद्मश्रेणी रचितचरणांभोरुहबलेः
स्थिरायास्त्वद्भक्ते स्त्रिपुरहर विस्फूर्जितमिदम् ॥११॥
अमुष्य त्वत्सेवा समधिगतसारं भुजवनं
बलात्कैलासेडपि त्वदधिवसतौ विक्रमयतः ।
अलभ्यापाताले डप्यलसचलितांगुष्ठशिरसि
प्रतिष्ठा प्रत्वय्या सीद्ध्रुवमुपचितो मुह्यति खलः ॥१२॥
यदद्धिं सुत्राम्णो वरद परमोच्चैरपि सती
मधश्चक्रे बाणः परिजनविधेयस्त्रिभुवनः ।
न तच्चित्रं तस्मिंन्वरिवसितरि त्वच्चरणयो
र्न कस्याप्युन्नत्यै भवति शिरसस्त्वय्यवनतिः ॥१३॥
अकाण्डब्रह्माण्डक्षयचकितदेवासुरकृपा
विधेयस्यासीद्यस्त्रिनयविषं संह्रतवतः ।
स कल्माषः कण्ठे तव न कुरुते न श्रियमहो
विकारोडपि श्लाध्यो भुवनभयभंगव्यसनिनः ॥१४॥
असिद्धार्था नैव कवचिदपि सदेवासुरनरे
निवर्तन्ते नित्यं जगति जयिनो यस्य विशिखाः ।
स पश्यन्नीश त्वामितरसरुरसाधारणमभूत्
स्मरः स्मर्तव्यात्मा नहि वशिषु पथ्यः परिभवः ॥१५॥
मही पादाधाताद् व्रजति सहसा संशयपदं
पदं विष्णोर्भ्राम्यद्भुजपरिघरुग्णग्रहगणम् ।
मुहुद्यौंर्दोस्थ्यं यात्यनिभृतजटाताडिततटा
जगद्रक्षायै त्वं नटसि ननु वामैव विभुता ॥१६॥
वियद्व्यापी तारागणगुणितफेनोद्गमरुचिः
प्रवाहो वारां यः पृषतलघुदष्टः शिरसि ते ।
जगद् द्वीपाकारं जलधिवलयं तेन कृतमि
त्यनेनैवोन्नेयं धृतमहिम दिव्यं तव वपुः ॥१७॥
रथः क्षोणी यन्ता शतधृतिरगेन्द्रो धनुरथो
रथाडगे चन्द्रार्कौ रथचरणपाणिः शर इति ।
दिधक्षोस्ते कोडयं त्रिपुरतृणमाडम्बरविधिर्
विधेयैः क्रीडन्त्यो न खलु परतन्त्राः प्रभुधियः ॥१८॥
हरिस्ते साहस्त्रं कमलबलिमाधाय पदयो
यदिकोने तस्मिन् निजमुदहरन्नेत्रकमलम् ।
गतो भकत्युद्रेकः परिणतिमसौ चक्रवपुषा
त्रयाणां रक्षायै त्रिपुरहर जागर्ति जगताम् ॥१९॥
क्रतौ सुप्ते जाग्रत्त्वमसि फलयोगे क्रतुमतां
क्व कर्म प्रध्वस्तं फलति पुरुषाराधनमृते ।
अतस्त्वां सम्प्रेक्ष्य क्रतुषु फलदानप्रतिभुवं
श्रुतौ श्रद्धां बद्ध्वा दटपरिकरः कर्मसु जनः ॥२०॥
क्रियादक्षो दक्षः क्रतुपतिरधीशस्तनुभृता
मृषीणामार्त्विज्यं शरणद सदस्याः सुरगणाः ।
क्रतुभ्रंषस्त्वत्तः क्रतुफलविधानव्यसनिनो
ध्रुवं कर्तुः श्रद्धाविधुरमभिचाराय हि मखाः ॥२१॥
प्रजानाथं नाथ प्रसभमभिकं स्वां दुहितरं
गतं रोहिद्भूतां रिरमयिषुमृष्यस्य वपुषा ।
धनुष्पाणेर्यातं दिवमपि सपत्राकृतंममुं
त्रसन्तं तेडद्यापि त्यजति न मृगव्याधरभसः ॥२२॥
स्वलावण्याशंसाधृतधनुषमह्नाय तृणवत्
पुरः प्लुष्टं दष्टवा पुरमथन पुष्पायुधमपि ।
यदि स्त्रैणं देवी यमनिरत देहार्धघटना
दवैति त्वामद्धा बत वरद मुग्धा युवतयः ॥२३॥
स्मशानेष्वाक्रीडा स्महर पिशाचाः सहचरा
श्चिताभस्मालेपः स्तगपि नृकरोटीपरिकरः ।
अमंगल्यं शीलं तव भवतु नामैवमखिलं
तथाडपि स्मर्तृणां वरद परमं मंगलमसि ॥२४॥
मनः प्रत्यक्चित्ते सविधमवधायात्तमरुतः
प्रह्रष्यद्रोमाणः प्रमदसलिलोत्संगितदशः ।
यदालोक्याह्लादं ह्रद इव निमज्ज्यामृतमये
दद्यत्यंतस्तत्त्वं क्रिमपि यमिनस्तत्किल भवान् ॥२५॥
त्वमर्कस्त्वं सोमस्त्वमसि पवनस्त्वं हुतवह
स्त्वमापस्त्वं व्योम त्वमु धरणिरात्मा त्वमिति च ।
परिच्छिन्नामेवं त्वयिपरिणता बिभ्रतु गिरं
न विद्मस्तत्तत्वं वयमिह तु यत्त्वं न भवसि ॥२६॥
त्रयीं तिस्त्रो वृत्तीस्त्रिभुवनमथो त्रीनपि सुरा
नकाराद्यैर्वर्णै स्त्रिभिरभिदधत्तीर्ण विकृतिः ।
तुरीयं ते धाम ध्वनिभिरवरुन्धानमणुभिः
समस्तं व्यस्तं त्वां शरणद गृणात्योमिति पदम् ॥२७॥
भवः शर्वो रुद्रः पशुपतिरथोग्रः सहमहां
स्तथां भीमशानाविति यदभिधानाष्टकमिदम् ।
अमुष्मिन्प्रत्येकं प्रवितरति देव श्रुतिरपि
प्रियायास्मै धाम्ने प्रणिहितनमस्योडस्मि भवते ॥२८॥
नमो नेदिष्ठाय प्रियदवदविष्ठाय च नमो
नमः क्षोदिष्ठाय स्मरहर महिष्ठाय च नमः ।
नमोवर्षिष्ठाय त्रिनयन यविष्ठा च नमः
नमः सर्वस्मै ते तदिदमितिशर्वाय च नमः ॥२९॥
बहलरजसे विश्वोत्पत्तौ भवाय नमो नमः
प्रबलतमसे तत्संहारे हराय नमो नमः ।
जनसुखकृते सत्त्वोद्रिक्तौ मृडाय नमो नमः
प्रमहसि पदे निस्त्रैगुण्ये शिवाय नमो नमः ॥३०॥
कृशपरिणति चेतः क्लेशवश्यं क्व चेदं
क्व च तव गुणसीमोल्लंधिनी शश्वद्रद्धिः
इति चकितममन्दीकृत्य मां भक्तिराधाद्
वरद चरणयोस्ते वाक्य-पुष्पोपहारम् ॥३१॥
असितगिरिसमंस्यात् कज्जलं सिंधुपात्रे
सुरतरुवरशाखा लेखिनी पत्रमुर्वि ।
लिखति यदि गृहीत्वा शारदा सर्वकालं
तदपि तव गुणाना मीश पारं न याति
असुरसुरमुनीन्द्रैरर्चितस्येन्दुमौले
र्ग्रथितगुणमहिम्नो निर्गुणस्येश्वरस्य ।
सकलगणवरिष्ठः पुष्पदन्ताभिधानो
रुचिरमलधुवृत्तैः स्तोत्रमेतच्चकार ॥३३॥
अहरहरनवद्यं धूर्जटेः स्तोत्रमेतत्
पठति परमभक्त्या शुद्धचित्तः पुमान्यः ।
स भवति शिवलोके रुद्रतुल्यस्तथाडत्र
प्रचुरतरधनायुः पुत्रवान्कीर्तिमांश्च ॥३४॥
महेशान्नापरो देवो महिम्नो नापरा स्तुतिः ।
अघोरान्नापरो मंत्रो नास्ति तत्त्वं गुरोः परम् ॥३५॥
ीक्षा दानं तपस्तीर्थं ज्ञानं यागादिकाः क्रियाः ।
महिम्नस्तवपाठस्य कलां नार्हन्ति षोडशीम् ॥३६॥
कुसुमदशननामा सर्वगन्धर्वराजः
शिशुशशिधरमौलेर्देव देवस्य दासः ।
स खलु निजमहिम्नो भ्रष्ट एवास्य रोषात्
स्तवनमिदमकार्षीद् दिव्यदिव्यं महिम्नः ॥३७॥
सुरवरमुनिपूज्यं स्वर्गमोक्षैकहेतुं
पठति यदि मनुष्यः प्रांजलिर्नान्यचेताः ।
व्रजति शिवसमीपं किन्नरैः स्तूयमानः
स्तवनमिदममोघं पुष्पदन्तप्रणीतम् ॥३८॥
आसमाप्तमिदं स्तोत्रं पुण्यं गंधर्वभाषितम् ।
अनौपम्यं मनोहारिशिवमीश्वरवर्णनम् ॥३९॥
इत्येषा वाडमयी पूजा श्रीमच्छंकरपादयोः ।
अर्पिता तेन देवेशः प्रीयतां मे सदाशिवः ॥४०॥
तव तत्त्वं न जानामि कीद्शोडसि महेश्वर ।
याद्सोडसि महादेव ताद्शाय नमो नमः ॥४१॥
एककालं द्विकालं वा त्रिकालं यः पठेन्नरः ।
सर्वपापविनिर्मुक्तः शिवलोके महीयते ॥४२॥
श्री पुष्पदंतमुखपंकजनिर्गतेन
स्तोत्रेंण किल्बिहरेण हरप्रियेण ।
कंठस्थितेन पठितेन समाहितेन
सुप्रीणितो भवति भूतपतिर्महेशः ॥४३॥

Tuesday, June 15, 2010

शनि देव की कृपा प्राप्ति के लिए छाया पात्र दान

मित्रो सायद ही कोई ऐसा हे जो परेशानियो से मुक्त हे ॥ और खास तोर पर शनि देव की जब बात आती हे तो लोगऐसे ही भयभीत हो जाते हे ॥ तो क्या ऐसा कर जिससे शनि शनि देव शांत हो .... शास्त्र में शनिदेव की पीड़ा दूरकरने के लिए छया पात्र दान का प्रयोग बहुत ही प्रभावशाली मन गया हे ... यह प्रयोग में लोक कल्याण की भावनासे यहाँ प्रस्तुत कर रहा हु ( कृपया यह प्रयोग आप सभी अपने अपने गुरु के मार्गदर्शन में करे )

शनिवार के दिन एक लोहे का पात्र ले पश्यात उसमे तेल भर के सवादो रूपये डाल दे बाद में अपनी छबी उस तेलभरे पात्र में देख ले और यह छबि देखते समय यह भाव मन में रक्खे की मेरा पूरा दोष यह तेल में जा रहा हे औरअभ मेरा पूरा दोष तेल में चला गया हे यह बोल कर यह तेल से भरा पात्र कोई शनि दान लेने वाले व्यक्ति को दे देनाचाहिए और जो दान लेने वाला व्यक्ति हे उसे काले उड़द, काले तिल, कला सुरमा, एक काले कपडे में बांध कर उसेदान में दे और मने ऐसा भाव करे की मेरे शभी दोष जो शनि देव जनित हे वो सभी दूर हो चुके हे , यह कार्य करने सेसमस्त ग्रह पीड़ा , रोग , दोष सभी कुछ चला जाता हे ( कृपया यह प्रयोग २४ शनिवार तक अवश्य करे )
यह प्रयोग की शुभता के लिए शनिमंत्र की ३ माला वश्य करे
मंत्र : ॐ एम रिम श्रीम शनेश्वराय नमः ( रुद्रक्स या लाल चन्दन की माला का प्रयोग करे )
कृपया यह प्रयोग किसी योग्य गुरु के मार्गदर्शन में ही करे ... जय एकलिंगजी