'' जे माताजी '' यहशब्द हम अक्षर शबके मुह से सुनते हे, हां ये माँ दुर्गा के लिए हे जो हमे इस ९ दिनों में जो भी चाहेफल देती हे , लेकिन शर्त ये हे की माँ की उपासना पुरे मन से की जाए , अब सवाल ये हे की किस तरह की जाए माँका पूजन एक सीधी सादी रित में बताता हु जो सामान्य इन्सान कर शकता हे
सर्व प्रथम तो आप शनिवार मतलब प्रथम नवरात्री के दिन सुबह कलश की स्थपना करेके पूजन करे और माताजीके श्री दुर्गा के सप्त स्लोकी चंडीपाठ कम से कम ३ या ९ बार करे बाद में निचे दिए गए मंत्र की कम से कम ९ औरज्यादा से ज्यादा १०८ माला का अनुष्ठान करे और सुबह शाम माताजी की आरती करे , हो शके तो यह छोटी सीपूजा विधि करके भी माताजी का आशीष ले शकते हे
मंत्र: ॐ ऍम रिम कलीम चामुंडाये विच्ये ।
श्री शनि देव सिंह राशिः से कन्या राशिः में आज प्रवेश कर रहे हे तो कोंसी राशिः के लोग क्या करे जिससे आनेवाले ढाई सालो में यह स्थिति का शुभ फल प्राप्त कर शके .....
१... मेष : आप हो शके तो श्री महा मृतुन्जय यन्त्र का विधि वत स्थापन कर के उसके मंत्र के जप नित्य करे
२... वृषभ: आप श्री महाकाल यन्त्र और सरस्वती यन्त्र का पूजन और मंत्र करके लाभ उठाये
३... मिथुन: आप श्री महालक्ष्मी जी के यन्त्र की पूजा करे जो लाभान्वित होंगे
४... कर्क: आप श्री देवी यन्त्र की स्थापना करके उसकी पूजा करे
५... सिंह: आप श्री सिद्ध धनदा यन्त्र को अपने पूजा स्थल में स्थापित करके उसका नित्य पूजन करे
६... कन्या: आप श्री शनि यन्त्र और श्री लक्ष्मी यन्त्र की साथ में पूजा करे लाभ की प्राप्ति होगी
७... तुला: आप श्री कुबेर यन्त्र की पूजा और द्रष्टि दोष नाशक प्रयोग अवश्य करे और लाभ उठाये
८... वृश्चिक : आप श्री सिद्ध शिव शक्ति यन्त्र को पूजास्थल में स्थापित करे और पूजन करके लाभ उठाये
९... धनु: आप श्री व्यापर वृद्धि यन्त्र और श्री रहू यन्त्र की एक साथ पूजा करे तो लाभान्वित होंगे...
१०... मकर: आप श्री भाग्योदय कवच धारण करे और धर्मं का प्रचार करे तो लाभान्वित होंगे
११... कुम्भ: आप श्री शनी कवच धारण करे और महा मृतुन्जय मंत्र का जप करे और लाभ उठाये
१२... मीन : आप श्री लक्ष्मी कवच धारण करे और श्री हनुमान जी को मंगलवार को प्रसाद चढाये
मित्रो अगर आप कोई भी चीज से परेशां हे और नोकरी में दिक्कत आ रही हे व्यापर मंदा हे या कोई भी और समस्या हे तो आप कृपया अपनी बर्थ डिटेल ( जन्मा तारीख, जन्मा समय, जन्म स्थल और हो शके तो आपका पुरा नाम और कांटेक्ट नम्बर और मेल आयडी अवश्य दे ) हम अपने ज्ञान से आपको सहाय करने की पुरी कोशिस करेगे और हा साथ में अपने पुरे सवाल लिखना न भूले..............रूशी पंड्या
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१.... पितृश्राद्ध के दिनों में पीपल के वृक्ष को रोज जल चढाये साथ में हो शके तो ॐ श्री पित्रुदेवाय नमः यह मंत्र अवश्य बोले ...
२... पिंडदान करो , गया तीर्थ में जा कर पितृ तर्पण करो
३... गरुड़ पूरण में दिए गए पितृ स्तोत्र का १६ दिनों तक नित्य पाठ करे
४... नित्य कौवे को खीर और पुरी का भोग लगाये
५... घर में पानी रखने के स्थान पर रोज सुबह शाम एक दीपक पित्रुओ के नम से जलाये और पितृ ओ से अपनी कामना की पूर्ति के लिए प्रार्थना करे ...
६... भादो महीने की अमावश्या के दिन पुरुषों को दूध में जल एवं काले तिल दल करे पीपल को अर्पण करना चाहिए की , पित्रुओ को शीघ्र तृप्ति मिल जाती हे यह भी एक मान्यता हे
पाठक वर्ग हो शके तो यह मार्ग अपना कर भी अपने पितृदोष को कुछ हद तक कम कर शकते हे............ मेरी शुभकामना आपके शाथ हे ........
॥ श्री यन्त्र ॥
श्री सूक्तं एवं श्री पुरूष सूक्तं एक सर्व श्रेष्ठ मार्ग हे शुख प्राप्ति का क्या आप जानते हे तो आप केसे करे यह उपासनाआईये हम कुछ जानकारी लेते हे ।
प्रथम तो आपको एक श्री यन्त्र जो संपूर्ण हो उसे पुरी वेदोक्त रीती से सिद्ध करवाना हे जेसे की उस श्री यन्त्र को प्रथमशुद्ध अवस्था में गंगाजल में ३ दिन तक रखे बाद में उसे आप शुभ मुहूर्त में प्राण प्रतिष्ठा करे बाद में उस पर लक्ष्मीके मूल मंत्र का सवालाख जप का अनुष्टान करे
( मन्त्र: ॐ श्रीम रिम श्रीम कमले कमलालये प्रसिद प्रसिद श्रीम रिम श्रीम महालक्ष्मेय नमः )
जब यह मंत्र का अनुस्तान पूर्ण हो जाए तब बाद में श्री सूक्तं के १००८ स्तोत्र करे , बादमें लक्ष्मी अष्टक के ५०१ स्तोत्र करे बाद में श्री पुरूष सूक्तं के १०८ स्तोत्र कर , यह संपूर्ण विधि के बाद इसके समीपयह सभी मंत्र-स्तोत्र के दशांश मतलब ( दशमे भाग की) आहुति दे , बाद में ये यन्त्र आपको सिद्धि देने को समर्थ होजाएगा
तो आप यह विधि से अपना श्री यन्त्र तैयार करे और लाभ उठाये
क्या आप जानते हे की ज्योतिष के पास भी स्वाइन फ्लू से बच ने के लिए उपाय हे जो उपाय करके आप शभी आनेवालेरोग से रक्षण ले शकते हे अगर आप से हो शके तो निचे दिए गए मन्त्र को प्रति दिन ३६ बार सुबह शाम करे ...
- ॐ गम गणपतये नमः
- रोगानशेसा नपहंशीतुष्टा रुष्टातू कामान सकलानभिस्तान
त्वमाश्रीतानाम नाविप्पनारानाम त्वामाश्रिता ह्याश्रयातम प्रयान्ति :
- जयंती मंगला कलि भद्रकाली कपाली नि
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोस्तुते ...
- ॐ त्र्यम्बकं यजामहे शुगंधिम पुष्टि वर्धनम
उर्वरुक्मेव बंधनान म्रुत्योन्म्रुक्षिय मामृतात ...
- ॐ नमः शिवाय : ( एक माला अवश्य करे )